Eid Ul Fitr Mubarak Shayari Hindi 2022 | ईद उल-फितर का इतिहास, Eid Mubarak

Eid Ul Fitr Mubarak : रमजान का महीना, इबादत, नफ्शक॒शी सांसारिक इच्छाओं का दमन और परहेजगारी का महीना होता है। गर्मी हो या सर्दी सूरज निकलने से पहले सेहरी खा ली जाती है। सेहरी में आमतौर पर दूध, सेवइयां और दूसरी हल्की-फुल्की चीजें खायी जाती हैं। सुबह की अजान होने से दिन डूबने तक खाना यहां तक कि पानी, सिगरेट, बीड़ी पीना तक मना होता है। रोज़ादार के लिए दुनिया की सारी जिम्मेवारिया पूरी करना भी आवश्यक हैं क्‍योंकि इस्लाम तकें-दुनिया (सांसारिक मोह से अलग होना) की शिक्षा नहीं देता

 

गर्मियों के रोज़े कैसे होते हैं

 

गर्मियों के रोज़े प्यास के कारण बहुत सख्त महसूस होते हैं। रोज़ा मनुष्य को उन गरीबों का दुःख-दर्द महसूस करना सिखाता है, जिनको दो वख्त की रोटी नहीं मिल पाती । इस महीने में संपन्‍न मुसलमानों पर अपनी जायदाद, नगदी और जेवर इत्यादि के मूल्य का ढाई प्रतिशत भाग जकात के रूप में गरीबों में देना भी फर्ज है। रमज़ान का महीना बड़ी धूम-धाम से गुजरता है

 

ईद-उल-फितर एक रूहानी महीने में कड़ी आजमाइश के बाद रोजेदार को अल्लाह की तरफ से मिलने वाला रूहानी इनाम है। ईद समाजी तालमेल और मोहब्बत का मजबूत धागा है, यह त्योहार इस्लाम धर्म की परंपराओं का आईना है। एक रोजेदार के लिए इसकी अहमियत का अंदाजा अल्लाह के प्रति उसकी कृतज्ञता से लगाया जा सकता है।

चांद के निकलने का महत्व

 

दरअसल इस्लामिक कैलेंडर चांद पर आधारित है। चांद के दिखाई देने पर ही ईद या प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं। रमजान के पवित्र माह का प्रारंभ चांद के देखने से होता है और इसका समापन भी चांद के ​निकलने से होता है। रमजान के 29 या 30 दिनों के बाद ईद का चांद दिखता है।

इस्लाम धर्म में एक अच्छा इंसान होने के लिए केवल इस्लाम धर्म का होना ही काफी नही है , इस धर्म में 5 नियमो का पालन करना अनिवार्य है – ईमान, नमाज अदा करना, हज की यात्रा , रोजा और जकात .

रमजान की शुरुआत कैसे हुई

 

रोजे की शुरुआत हजरत दुनिया के पहले इंसान हजरत आदम अलै. के जमाने से ही हो गई थी। रिवायत से पता चलता है यहूद और नसारा भी रोजे रखते थे, यूनानियों के यहां भी रोजे का वजूद मिलता है। हिंदू और बौद्ध धर्म में भी व्रत-धर्म का एक भाग है। पारसियों के यहां भी रोजे को बेहतरीन इबादत समझा गया है, जिससे सिद्ध होता है कि दुनिया के तमाम धर्मों में रोजे की फ जीलत व अहमियत पाई जाती है।

रोजा क्यों रखे जाते हैं

 

इस्लाम के मानने वाले हर बालिग शख्स पर पर रोजा फर्ज यानी जरूरी है. रमजान के पवित्र महीने में मुसलमान लोग रोजा रखते हैं. इस दौरान सूरज निकलने से लेकर सूर्यास्त तक कुछ भी खाया-पिया नहीं जाता है. रमजान रहमतों और बरकतों का महीना है. इसीलिए हर मुस्लिम इस पूरे महीने में अल्लाह की इबादत करता है और चैरिटी (दान) सहित तमाम नेक काम करता है.

 

भारत में इस साल रमजान के महीने की शुरुआत बुधवार से होगी यानी पहला रोजा 2 अप्रैल को रखा जाएगा. मौलाना खालिद रशीदी फिरंगी महली सहित तमाम मुस्लिम उलेमाओं ने ऐलान किया है कि भारत में सोमवार को रमजान का चांद नहीं निकला है. ऐसे में ऐसे में मंगलवार की रात से विशेष नमाज अदा की जाएगी, जिसे तराबी कहते हैं.

रोजा में क्या क्या नहीं करना चाहिए

 

1. अल्लाह के नाम पर झूठ नहीं:
अल्लाह का नाम लेकर किसी को धोखा ना दें. इस पाक महीने में यदि कोई इस्लाम का अनुयायी झूठ बोलता है या अल्लाह का नाम लेकर किसी से पैसे लेता है तो इसे धोखा माना जाएगा. ऐसा करने वाले व्यक्ति को अल्लाह सजा देते हैं.

 

2. शारीरिक संबंध:
रमजान के पाक महीने के दौरान शारीरिक संबंध बनाने की या किसी भी प्रकार की यौन क्रिया करने की मनाही होती है. इस महीने में अपनी सभी इच्छाओं पर नियंत्रण रखना होता है. इस दौरान अश्लील या अभद्र कार्य ना करें और भी अनैतिक व्यवहार करने से बचें.

 

3. धूम्रपान और शराब:
धूम्रपान और शराब की गिनती बुराईयों में होती है. रमजान के दौरान धूम्रपान और शराब सेवन की मनाही होती है. रमजान के महीने में शराब और सिगरेट पीने वाले शख्स को रोजा का फल प्राप्त नहीं होता.

 

4. लड़ाई-झगड़ा और गाली देना
रमजान का महीना धैर्य सिखाता है. खुद पर और अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना सिखाता है. इस दौरान किसी से लड़ने और गाली देने से आपकी आत्मा शुद्ध नहीं होगी. मन और आत्मा को साफ करना रमजान का मुख्य उद्देश्य है.

 

5. चुगली या ग़ीबत (दूसरों की बुराई करना
कुरान में दूसरों की बुराई करने और दूसरों की महिलाओं पर बुरी नजर रखने को पाप माना गया है. ऐसे में रमजान के महीने में दूसरों की बुराई करने और महिलाओंं पर बुरी नजर रखने वाले व्यक्ति को नर्क नसीब होता है.

Eid Ul Fitr Mubarak Shayari in Hindi

यूँ तो इबादत बहुत की तुमने,
रोजे में खुदा से मोहब्बत की तुमने,
चलो अब वक्त आया है इबादत का सिला पाएं,
मुबारक हो चाँद तुमको, चलो ईद का जश्न मनाएं।

अल्लाह की करते हैं तहे दिल इबादत
दुश्मन हो या दोस्त रखे सभी को सलामत
कुबूल फ़रमाय से शायरी का नज़राना
ईदी चाहिये तो घर जरुर आना

हर ख्वाहिश हो मंजूर-ए-खुदा
मिले हर कदम पर रज़ा-ए-खुदा,
फ़ना हो लब्ज़-ए-ग़म यही हैं दुआ
बरसती रहे सदा रहमत-ए-खुदा

Eid Ul Fitr Mubarak

ईद आई तुम न आए क्या मज़ा है ईद का
ईद ही तो नाम है इक दूसरे की दीद का

Happy Eid al fitr Wishes

ए चांद, तू उनको मेरा पैगाम कह देना
खुशी का दिन और हंसी की शाम देना
जब वो देखे तुझे बाहर आकर
उनको मेरी तरफ से ईद मुबारक कह देना

तारो से आसमा में खिली रहे बहार
चाँद के जैसा पाक हो सभी का प्यार
होता रहे युहीं अपनों से दीदार
मुबारक हो तुमकों ईद का त्यौहार

तमन्ना आपकी सब पूरी हो जाए
हो आपका मुकद्दर इतना रोशन की
आमीन कहने से पहले ही आपकी हर दुआ कबूल हो जाए

मुस्कुराते रहो जैसे खिला हुआ फूल
गमो की बेला जाये तुमको भूल
ऐसे ही प्रेम की चलती रहे रीत
इसी दुआ के साथ मुबारक हो ईद

कोई इस चाँद से तो पूछे उसका मजहब क्या है ।
कल ईद पे हंस रहा था आज तीज पे मुस्करा रहा है ।।

Eid Ul-Fitr Mubarak Whatsapp Status

ऐ दोस्त तेरे पास होते तो गले लगाते
दूर ही सही फिर हम वो रस्म निभायेंगे
गले तो नहीं पर शायरी सुनायेंगे
ईद मुबारक हो मुबारक ज़ोर- ज़ोर से चिल्लायेंगे

सदा हंसते रहो जैसे हंसते हैं फूल
दुनिया के सारे गम तुम जाओ भूल
चारों तरफ फैलाओ खुशियों के गीत
इसी उम्मीद के साथ आपको मुबारक हो ईद

मुबारक मौका हैं करो खुदा की इबादत
खुशियों से भरी ये जिंदगी रहे सलामत
अदा करे हर फ़र्ज़ खुदा की रहमत में
पाक दिल युही सजदा करें रमज़ान के महे में।

नजर का चैन दिल का सुरूर होते हैं,
कुछ ऐसे लोग जहाँ में जरूर होते है,
सदा चमकता रहे इन की ईद का त्यौहार,
करीब रह के भी जो दिल से दूर होते हैं।

देखा ईद का चाँद तो मांगी ये दुआ रब से,
देदे तेरा साथ ईद का तोहफा समझ कर।
ईद मुबारक।

ईद का त्यौहार आया है,
खुशियाँ अपने संग लाया है,
खुदा ने दुनिया को महकाया है,
देखो फिर से ईद का त्यौहार आया है,
आप सभी को दिल से ईद मुबारक।

FAQ

 

Q : रमजान के कितने दिनों बाद ईद आती है ?
Ans : रमजान के 29 या 30 दिनों के बाद ईद का चांद दिखता है.

 

Q : 2022 में रमजान ईद कब है ?
Ans : 2 या 3 मई को हैं.

 

Q : ईद की नमाज कब होती हैं ?
Ans : सुबह करीब 7.30 बजे नमाज अदा की जाएती हैं.

 

Q : रोजा रखने वाला को क्या कहते है ? 
Ans : रोजादार कहते हैं.

 

Q : ईद उल-फितर किसका त्यौहार है ?
Ans : यह मुस्लिम धर्म का त्यौहार है.

 

 

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